रोज़ा रखने की नियत किस समय करें?
हफ़्सा रज़ियल्लाहू अन्हा कहती हैं: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः “जिसने भी रोज़ा रखने की नीयत रात (फ़जर से पहले) नहीं की तो उसके लिए कोई रोज़ा नहीं है”.
[देखें सह़ीह़ अबू दाऊद (न. 209) और अल ईरवा, अल अल्बानी (4/45)]
क्या सह़री (सुहूर) के समय कुछ खाना (जलपान करना) चाहिए?
अनस बिन मालिक कहते हैं: नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः “सह़री किया करो क्योंकि इसमें बरकत होती है”.
[अल बुख़ारी (न. 1923)]
रोज़ा रखनॆ का समय कब से शुरू होता है?
फ़जर का समय होते ही रोज़ा शुरू हो जाता है. अल्लाह का फरमान है: “…और तुम खाते पीते रहो यहाँ तक की सुबह का सफे़द धागा रात के काले धागे से ज़ाहिर हो जाए”. (कुरान 2:187)
क्या रोज़े के स्तिथि में मेरी दुआएँ क़ुबूल होती हैं?
अनस बिन मालिक कहते हैं: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा: “तीन लोगों की दुआ नकारी नही जाती, एक पिता की दुआ अपने बच्चे के लिए, रोजे़दार की दुआ, और मुसाफ़िर की दुआ”.
[देखें अस़-स़ह़ीह़ (न. 1797) अल अल्बानी]
रोज़ा कब ख़त्म करना (खोलना/तोड़ना) चाहिए?
सहल बिन साद बताते हैं: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा: “लोग तब तक अच्छाई पर रहेंगे जब तक वो इफ़्तार करने में जल्दी करेंगे”.
[अल बुखा़री (न. 1856), जैसे ही सूरज डूबने लगे, जल्द से जल्द रोज़ा ख़तम कर देना (तोड़ देना/खोलना) चाहिए]
रोज़ा किस चीज़ के साथ ख़तम किया (खोला/तोड़ा) जाए?
अनस बिन मालिक कहते हैं: “रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अक्सर रोज़ा नमाज़ अदा करने से पहले ताज़े खजूरों से तोड़ते थे, अगर ये (ताजे खजूर) मौजूद ना होते तो सूखे खजूरों का इस्तेमाल करते थे, अगर सूखे खजूर मौजूद ना होते तो पानी की कुछ घूंट पीते थे”.
[अल इरवा (4/45) अल अल्बानी]
रोज़ा ख़तम करते (खोलते/तोड़ते) समय क्या कहना चाहिए?
अब्दुल्लाह बिन उमर ने बताया: जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम रोज़ा तोड़ते तो वह कहते:
ذَهَبَ الظَّمَأُ، وَابْتَلَّتِ العُرُوقُ، وَثَبَتَ الأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللهُ
प्यास बुझ गई, नसे नम हो गई और अजर पक्का हो गया इन शा अल्लाह
[देखें अल इरवा (4/39) अल अल्बानी]
Taken from Masjid Daar us Sunnah, UK – English Version